| Paper Title |
बालोद जिले के डौंडी विकासखण्ड में परिचालित जोत के आकार का विश्लेषण (2015-16 से 2021-22): एक भौगोलिक अध्ययन |
| Author(s) | Mrs. Shristi Verma, Dr. Ranjana Sharma, Dr. S. D. Deshmukh. |
| Country | India |
| Abstract |
भूमि किसी भी कृषि प्रधान क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की आधारभूत इकाई होती है और परिचालित जोत का आकार, संख्या तथा प्रकृति क्षेत्र की कृषि उत्पादकता, किसानों की आर्थिक स्थिति एवं ग्रामीण सामाजिक संरचना को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। प्रस्तुत शोध पत्र छत्तीसगढ़ राज्य के बालोद जिले के एकमात्र आदिवासी विकासखण्ड डौंडी में परिचालित जोत की संख्या, आकार तथा वर्गीकरण का कृषि गणना 2015-16 एवं 2021-22 के आँकड़ों के आधार पर कालिक एवं तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन में प्रति जोत कार्यरत व्यक्तियों की संख्या, जोत के औसत आकार— सीमांत, लघु, अर्ध्दमध्यम, मध्यम एवं वृहद जोत के वर्गीकरण तथा सामाजिक वर्गानुसार— अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अन्य एवं संस्थागत(वह भूमि अथवा जोत जो निजी न हो कर किसी संस्था के नियंत्रण में होता है।)जोत के स्वरूप का विश्लेषण किया गया है। परिणामों से स्पष्ट होता है कि अध्ययन अवधि में जोत की कुल संख्या में वृद्धि हुई है जबकि प्रति जोत औसत आकार में कमी आयी है, जो भूमि के निरंतर विखण्डन (Land Fragmentation) की प्रक्रिया को दर्शाता है। सीमांत एवं लघु जोत की संख्या एवं क्षेत्रफल में वृद्धि हुई है जबकि अर्ध्दमध्यम, मध्यम एवं वृहद जोत की संख्या तथा क्षेत्रफल में कमी दर्ज की गयी है। इसका प्रमुख कारण जनसंख्या वृद्धि तथा पारिवारिक उत्तराधिकार के फलस्वरूप भूमिका विभाजन है। जनजातीय बहुल क्षेत्र होने के कारण अनुसूचित जनजाति वर्ग के पास सर्वाधिक जोत तथा क्षेत्रफल पाए गए। यह अध्ययन भूमि प्रबंधन, चकबंदी तथा सतत कृषि विकास हेतु नीति-निर्माण में सहायक सिद्ध हो सकता है। |
| Keywords | परिचालित जोत, जोत का आकार, सामाजिक वर्गानुसार जोत, कृषि गणना, भूमि विखंडन |
| Subject Area | Geography |
| Issue | Volume 3, Issue 7 (July 2026) |
| Published | 2026/07/31 |
| How to Cite | Verma, S., Sharma, R., & Deshmukh, S. D. (2026). बालोद जिले के डौंडी विकासखण्ड में परिचालित जोत के आकार का विश्लेषण (2015-16 से 2021-22): एक भौगोलिक अध्ययन. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(7), 231–241. https://doi.org/10.70558/SPIJSH.2026.v3.i7.45866 |
| DOI | 10.70558/SPIJSH.2026.v3.i7.45866 |
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