| Paper Title |
रेशम उत्पादन से ग्रामीण परिवारों में सामाजिक परिवर्तन का अध्ययन एक वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध-पत्र – ग्रामीण समाज शास्त्र, कृषि-अर्थशास्त्र और लैंगिक अध्ययन के अंतर्विषयी परिप्रेक्ष्य में |
| Author(s) | डॉ. आशुतोष. |
| Country | India |
| Abstract |
सारांश रेशम उत्पादन ग्रामीण भारत में कृषि, कुटीर उद्योग और परिवार-आधारित श्रम का ऐसा संगम है, जिसमें पोषक वृक्षों की खेती से लेकर कीटपालन, कोकून उत्पादन, रीलिंग, कताई, बुनाई और विपणन तक कई प्रक्रियाएं शामिल हैं। इस शोध-पत्र का उद्देश्य यह है कि इस आजीविका से ग्रामीण परिवारों की आय, रोजगार, लैंगिक भूमिका, शिक्षा, स्वास्थ्य, निर्णय-निर्माण, सामाजिक प्रतिष्ठा और सामुदायिक सहभागिता में क्या बदलाव आता है। 2020 से 2025 के बीच प्रकाशित सरकारी प्रतिवेदनों, योजना-दस्तावेजों और सहकर्मी-समीक्षित अध्ययनों का विषयगत संश्लेषण अध्ययन में वर्णनात्मक और विश्लेषणात्मक है। उपलब्ध प्रमाण दर्शाते हैं कि रेशम उत्पादन अल्पसंख्यक और सीमांत कृषकों को पूरक आय, वर्ष के भीतर बार-बार काम और परिवार के निकट काम दे सकता है। इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ती है, लेकिन यह अपने आप आय पर नियंत्रण, सार्वजनिक गतिशीलता, परिसंपत्ति स्वामित्व या स्वतंत्र निर्णय क्षमता में बदल नहीं जाता। जब परिवारों को गुणवत्तापूर्ण बीज, तकनीकी प्रशिक्षण, रोग नियंत्रण, सस्ती पूँजी, पारदर्शी कोकून बाजार, उत्पादक समूह और मूल्य-संवर्धन की सुविधाएँ मिलती हैं, तो सामाजिक लाभ अधिक स्पष्ट होते हैं। इसके विपरीत, परिवर्तन को मूल्य-अस्थिरता, बीमारी, जलवायु जोखिम, बिचौलिया-निर्भरता, महिलाओं की दोहरी कार्य-भूमिका और संस्थागत पहुँच की असमानता सीमित करती है। शोध-पत्र का मत है कि रेशम उत्पादन को केवल उत्पादन-वृद्धि कार्यक्रम के रूप में नहीं चलाना चाहिए; इसके बजाय, इसे परिवार-केंद्रित सामाजिक विकास, कौशल-विकास, लैंगिक न्याय और स्थानीय मूल्यों के साथ मिलकर चलाना चाहिए। |
| Keywords | रेशम उत्पादन, ग्रामीण परिवार, सामाजिक परिवर्तन, महिला सशक्तिकरण, आजीविका-सुरक्षा, सामाजिक गतिशीलता |
| Subject Area | Sociology |
| Issue | Volume 3, Issue 7 (July 2026) |
| Published | 2026/07/27 |
| How to Cite | आशुतोष (2026). रेशम उत्पादन से ग्रामीण परिवारों में सामाजिक परिवर्तन का अध्ययन एक वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध-पत्र – ग्रामीण समाज शास्त्र, कृषि-अर्थशास्त्र और लैंगिक अध्ययन के अंतर्विषयी परिप्रेक्ष्य में. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(7), 109–122. https://doi.org/10.70558/SPIJSH.2026.v3.i7.45840 |
| DOI | 10.70558/SPIJSH.2026.v3.i7.45840 |
View / Download PDF File