| Paper Title |
हिमालयी विकास और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड: विकसित भारत @2047 की दिशा में एक समग्र विश्लेषण |
| Author(s) | डॉ. दलीप सिंह बिष्ट. |
| Country | India |
| Abstract |
शोध सार : “हिमालयी विकास और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड: विकसित भारत @2047 की दिशा में एक समग्र विश्लेषण” विषय पर आधारित यह शोधपत्र उत्तराखण्ड के भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक एवं पारिस्थितिक आयामों का गहन अध्ययन प्रस्तुत करता है। हिमालयी क्षेत्र, विशेषकर उत्तराखण्ड, अपनी विशिष्ट भौगोलिक संरचना, समृद्ध जैव-विविधता, सांस्कृतिक विरासत तथा प्राकृतिक संसाधनों के कारण विकास की अपार संभावनाओं से युक्त है, किन्तु साथ ही यह क्षेत्र भूकंप, भूस्खलन, जलवायु परिवर्तन और पलायन जैसी गंभीर चुनौतियों का भी सामना कर रहा है। इस शोध में हिमालयी विकास की अवधारणा को सतत विकास, पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय सहभागिता के संदर्भ में स्पष्ट किया गया है तथा आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के निर्माण हेतु कृषि, जैविक खेती, पर्यटन, लघु एवं कुटीर उद्योग, जल संसाधन एवं नवीकरणीय ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्रों की संभावनाओं का विश्लेषण किया गया है। इसके अतिरिक्त, “विकसित भारत @2047” के राष्ट्रीय लक्ष्य के परिप्रेक्ष्य में उत्तराखण्ड की रणनीतिक भूमिका को रेखांकित करते हुए यह शोध बताता है कि किस प्रकार स्थानीय संसाधनों का समुचित उपयोग, कौशल विकास, डिजिटल सशक्तिकरण, हरित विकास नीतियाँ तथा प्रभावी आपदा प्रबंधन प्रणाली राज्य को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक हो सकती हैं। यह अध्ययन इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि यदि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए समावेशी एवं सहभागी नीतियों को अपनाया जाए, तो उत्तराखण्ड न केवल आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि विकसित भारत के निर्माण में एक मॉडल राज्य के रूप में उभर सकता है। |
| Keywords | प्रमुख शब्द : हिमालयी विकास, आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड, सतत विकास, विकसित भारत @2047, जैविक कृषि, पर्यटन विकास, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, पलायन, स्थानीय संसाधन, हरित अर्थव्यवस्था, आपदा प्रबंधन, कौशल विकास। |
| Subject Area | Political Science |
| Issue | Volume 3, Issue 8 (August 2026) |
| Published | 2026/08/05 |
| How to Cite | दलीप सिंह बिष्ट (2026). हिमालयी विकास और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड: विकसित भारत @2047 की दिशा में एक समग्र विश्लेषण. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(8), 1–10. https://doi.org/10.70558/SPIJSH.2026.v3.i8.45871 |
| DOI | 10.70558/SPIJSH.2026.v3.i8.45871 |
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