| Paper Title |
धर्मवीर भारती के गीतिनाट्य ‘अंधायुग’ की कथ्य-चेतना |
| Author(s) | Dr. Surendra Kumar. |
| Country | India |
| Abstract |
धर्मवीर भारती का ‘अंधायुग’ आधुनिक हिन्दी साहित्य का एक महत्वपूर्ण गीतिनाट्य है, जिसमें महाभारत के युद्धोत्तर प्रसंग के माध्यम से आधुनिक मानव-सभ्यता के नैतिक, सांस्कृतिक और अस्तित्वगत संकट का प्रभावशाली चित्रण किया गया है। इस कृति की कथ्य-चेतना युद्ध-विरोध, मानवीय मूल्यों की रक्षा, सत्ता की विवेकहीनता, मर्यादा के विघटन तथा नैतिक उत्तरदायित्व पर आधारित है। भारती ने पौराणिक कथा को समकालीन यथार्थ का रूपक बनाकर यह स्थापित किया है कि युद्ध की सबसे बड़ी क्षति मानवता और नैतिक चेतना की होती है। नाटक के पात्र बाह्य संघर्ष के साथ-साथ आंतरिक द्वंद्व, अपराध-बोध और मानसिक विघटन का अनुभव करते हैं, जिससे अस्तित्ववादी चेतना का सशक्त स्वर उभरता है। कृष्ण के माध्यम से लेखक विनाश के बीच भी विवेक, साहस, सृजनशीलता और पुनर्निर्माण की संभावना में विश्वास व्यक्त करते हैं। इस प्रकार ‘अंधायुग’ केवल महाभारत का पुनर्पाठ नहीं, बल्कि आधुनिक युग के लिए मानवतावादी चेतना, नैतिक पुनर्जागरण और सांस्कृतिक पुनर्स्थापना का कालजयी संदेश है। |
| Keywords | कथ्य-चेतना, पौराणिक पुनर्पाठ, युद्धोत्तर संवेदना, अस्तित्ववादी चेतना, सांस्कृतिक विघटन, मानवीय मूल्य, नैतिक उत्तरदायित्व, मानवतावाद। |
| Subject Area | Hindi |
| Issue | Volume 3, Issue 7 (July 2026) |
| Published | 2026/07/20 |
| How to Cite | Kumar, S. (2026). धर्मवीर भारती के गीतिनाट्य ‘अंधायुग’ की कथ्य-चेतना. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(7), 69–75. https://doi.org/10.70558/SPIJSH.2026.v3.i7.45838 |
| DOI | 10.70558/SPIJSH.2026.v3.i7.45838 |
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